मंगलवार, 17 सितंबर 2019

सफलता एक संगम है

परमपिता परमेश्वर, देवतुल्य गुरुजन, मेरे चाहने  वालों माता-पिता के आशीर्वाद और दुआओं से राजस्थान सेकंड ग्रेड टीचर एग्जाम 2016 में 232 वीं जनरल रैंक से चयनित  होने पर आप सभी का हार्दिक आभार!!धन्यवाद!!

सफल पुरुष भरमवश अपनी सफलता का श्रेय केवल और केवल स्वयं (अपने आप) को देता रहता है जबकि मुझे तो नागार्जुन की कविता फसल सिखाती है कि:- एक के दो के नही कई नदियों के पानी का जादू है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे कई गुरुओ के ज्ञान कौशल का समग्र रूप है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
हवा की थिरकन है सूरज की किरणों का रूपांतरण है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे स्नेहीजनों और सद्-मित्रों की सुसंगति का असर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
नागार्जुन के शब्दों में मिट्टी का गुणधर्म है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे माता-पिता और भाई के संचित पसीने से पोषित माहौल पर निर्भर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
किसान के हाथों की मेहनत के स्पर्श की गरिमा है फसल, ठीक इसी प्रकार प्रतियोगी भावों से पूरित त्याग,समर्पण,धैर्य-धीरज और मेहनत से सिंचित है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
कुल मिलाकर जिस प्रकार कोई फसल किसी एक तत्व का सयोंग मात्र नही होकर कई घटकों का यानी पानी,प्रकाश,वायु,मिट्टी की अनुकूलता और किसान की मेहनत आदि सकारात्मक तत्वों संगम है ठीक इसी प्रकार अपने जीवन की हर मंजिल की नींव भी माता-पिता,भाई-सखा और गुरुजन इत्यादि सकारात्मक संघटकों द्वारा अपने-अपने स्तर पर बहुत बड़े योग के रूप में किसी मंजिल की सीढ़ियां बनकर हमे गंतव्य तक पहुचने में सहयोग प्रदान करते  है और भरमवश लोग यह भूल जाते है कि इन लोगो की बदौलत ही आज हमने यह मुकाम पाया है  यही अपने जीवन की सफलता का मूल मंत्र है।।

मेरे परम् आदरणीय  गुरु और गुरुतुल्य  मित्रों आपको पाकर मेरे जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार मिटा हैं।
आपके ही मार्गदर्शन से ही मेरा जीवन #जीवन बना है, ईश्वर से प्रार्थना है की मैं आप के बताए पथ पर अनवरत आगे बढ़ सकू ,
ऐसा आशीर्वाद आपका सदैव मिलता रहे ।।

अतः गुरु ही जीवन तारक है, गुरु ही तीर्थ, गुरु ही उद्धारक है।।
आप जैसे गुरुओ ने ही तो दी है इस छोटे साधक को एक नई पहचान, मैं तो कहूंगा गुरु ही ईश्वर गुरु ही है भगवान।।
जिसे मैं राधकृष्ण कहे सकू वो मेरे समस्त समादृत गुरुजन जिन्होंने मुझे ककहरा से लेकर इस मुकाम योग्य ज्ञान सीखाया है, कल तक जो जिंदगी एक अभिशाप थी आज मुझे आपने इसे मेहनत के बल आसान करना सिखाया है।।
जब-जब मुझे अंधकार नजर आया तब आपने ही इस भटके राही को प्रकाश दिखाया है ।। उन्ही की बदौलत आज  वही अभिशाप भरी  जिंदगी वरदान है ।।

आप लोगो का बहुत-बहुत आभार।।
आपका आभारी- भींवराज गुर्जर👏👏

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