नमस्कार दोस्तों !!
परमपिता परमेश्वर की असीम अनुकंपा और माता पिता के आशीर्वाद व देदिप्यमान विद्वत्ता की प्रतिमूर्ति मेरे गुरुजन वर्ग के मार्गदर्शन और आप सभी मित्रों की प्रेरणा से आज दिनांक 28/09/2018 को राजकीय माध्यमिक विद्यालय-फालकी(रियां बड़ी) में वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) हिन्दी के पद पर कार्य ग्रहण किया।
इस सफलता का श्रेय ईश्वर की प्रतिमूर्ति मेरे देवतुल्य गुरुजन मनोज सर व माता-पिता के आशीर्वाद और भाई खींवाराम व समस्त भाईतुल्य मित्रों की प्रेरणा को जाता है ।।
ईश्वर से यही प्रार्थना है कि मुझे इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वाहन 'पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी' से निभाने की शक्ति दे।।
मैं उन मित्रों का भी अत्यंत आभारी हूं जो मेरे जीवन के हर उतार-चढ़ाव में मेरे साथ खड़े रहकर मुझे सकारात्मक ऊर्जा व उत्साह देते रहे।
सफल पुरुष भरमवश अपनी सफलता का श्रेय केवल और केवल स्वयं यानी अपने आप को देता रहता है जबकि मुझे तो नागार्जुन की कविता फसल सिखाती है कि:- एक के नही दो के नही कई नदियों के पानी का जादू है फसल,
ठीक इसी प्रकार मेरे कई गुरुओ के ज्ञान कौशल का समग्र प्रतिरूप है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
जिस प्रकार हवा की थिरकन है सूरज की किरणों का रूपांतरण है फसल,
ठीक इसी प्रकार मेरे स्नेहीजनों और सद्-मित्रों की सुसंगति का असर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
नागार्जुन के शब्दों में मिट्टी का गुणधर्म है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे माता-पिता और भाई के संचित पसीने से पोषित माहौल पर निर्भर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
जिस प्रकार किसान के हाथों की मेहनत के स्पर्श की गरिमा है फसल, ठीक इसी प्रकार शुद्ध प्रतियोगी भावों से पूरित त्याग,समर्पण ,धीरज-धैर्य की मेहनत से सिंचित है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
कुल मिलाकर जिस प्रकार कोई फसल किसी एक तत्व का सयोंग मात्र नही होकर कई घटकों यानी पानी,प्रकाश,वायु,मिट्टी आदि की अनुकूलता और किसान की मेहनतन जैसे सकारात्मक घटकों का संगम है ।
ठीक इसी प्रकार अपने जीवन की सफ़लता रूपी मंजिल की नींव भी माता-पिता,भाई-सखा व गुरुजन वर्ग इत्यादि सकारात्मक संघटकों द्वारा अपने-अपने स्तर पर बहुत बड़े योग के रूप बनती है ओर यही सम्मलित घटक किसी मंजिल की सीढ़ियां बनकर हमे गंतव्य तक पहुचने में सहयोग प्रदान करते है और हम लोग भरमवश यह भूल जाते है कि इन लोगो की बदौलत ही आज हमने यह मुकाम पाया है।
यही अपने जीवन की सफलता का मूल मंत्र है।।
मेरी इस सफलता की सीढ़ियां बने मेरे परम् आदरणीय गुरुजन जिसमे विशेषकर मनोज सर, प्रेम सर, राजेश जी,ओमजी व समस्त गुरुजन व सरस्वती ज्ञान केंद्र के समस्त गुरुतुल्य साथी जिनको पाकर मेरे जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार मिटा तथा आपके ही मार्गदर्शन से यह जीवन #जीवन बना है, अब परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है की मुझे आप के बताए पथ पर अनवरत आगे बढ़ने की शक्ति दे।
आप सबका आशीर्वाद सदैव यूं ही मिलता रहे यही मेरी भावी सफलता होगी ।।
मैं मेरे उन समस्त गुरुजन का भी विशेष आभारी हूं जिन्होंने मुझे *क, ख ग घ ड़* से लेकर इस मुकाम के योग्य अपेक्षित ज्ञान से पूरित किया और एक जीवनसार सिखाया तथा मेरे लक्ष्य साधक रहे।।
आप सब लोगो का पुनः बहुत-बहुत आभार।।
आपका आभारी- भींवा राम गुर्जर
वरिष्ठ अध्यापक (हिन्दी)