शनिवार, 28 सितंबर 2019

प्रथम नियुक्ति

नमस्कार दोस्तों !!
परमपिता परमेश्वर की असीम अनुकंपा और माता पिता के आशीर्वाद व देदिप्यमान विद्वत्ता की प्रतिमूर्ति मेरे  गुरुजन वर्ग के मार्गदर्शन  और आप सभी मित्रों की प्रेरणा से आज दिनांक 28/09/2018  को राजकीय माध्यमिक विद्यालय-फालकी(रियां बड़ी) में वरिष्ठ अध्यापक  (द्वितीय श्रेणी) हिन्दी के पद पर कार्य ग्रहण किया।
इस सफलता का श्रेय ईश्वर की प्रतिमूर्ति मेरे देवतुल्य गुरुजन मनोज सर व माता-पिता  के आशीर्वाद  और   भाई खींवाराम व समस्त भाईतुल्य मित्रों की प्रेरणा को जाता है ।।

ईश्वर से यही प्रार्थना है कि मुझे इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वाहन 'पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी' से निभाने की शक्ति दे।।

मैं उन मित्रों का  भी अत्यंत आभारी हूं जो मेरे जीवन के हर उतार-चढ़ाव में मेरे साथ खड़े रहकर मुझे सकारात्मक ऊर्जा व उत्साह देते रहे।

सफल पुरुष भरमवश अपनी सफलता का श्रेय केवल और केवल स्वयं यानी अपने आप को देता रहता है जबकि मुझे तो नागार्जुन की कविता फसल सिखाती है कि:- एक के नही दो के नही कई नदियों के पानी का जादू है फसल,
ठीक इसी प्रकार मेरे कई गुरुओ के ज्ञान कौशल का समग्र प्रतिरूप है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
जिस प्रकार हवा की थिरकन है सूरज की किरणों का रूपांतरण है फसल,
ठीक इसी प्रकार मेरे स्नेहीजनों और सद्-मित्रों की सुसंगति का असर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
नागार्जुन के शब्दों में मिट्टी का गुणधर्म है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे माता-पिता और भाई के संचित पसीने से पोषित माहौल पर निर्भर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।

जिस प्रकार किसान के हाथों की मेहनत के स्पर्श की गरिमा है फसल, ठीक इसी प्रकार शुद्ध प्रतियोगी भावों से पूरित त्याग,समर्पण ,धीरज-धैर्य की  मेहनत से सिंचित है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
कुल मिलाकर जिस प्रकार कोई फसल किसी एक तत्व का सयोंग मात्र नही होकर कई घटकों यानी पानी,प्रकाश,वायु,मिट्टी आदि की अनुकूलता और किसान की मेहनतन जैसे सकारात्मक घटकों का संगम है ।
ठीक इसी प्रकार अपने जीवन की  सफ़लता रूपी मंजिल की नींव भी माता-पिता,भाई-सखा व गुरुजन वर्ग इत्यादि सकारात्मक संघटकों द्वारा अपने-अपने स्तर पर बहुत बड़े योग के रूप बनती है ओर यही सम्मलित घटक  किसी मंजिल की सीढ़ियां बनकर हमे गंतव्य तक पहुचने में सहयोग प्रदान करते  है और  हम लोग भरमवश यह भूल जाते है कि इन लोगो की बदौलत ही आज हमने यह मुकाम पाया है।
  यही अपने जीवन की सफलता का मूल मंत्र है।।

मेरी इस सफलता की सीढ़ियां बने मेरे परम् आदरणीय  गुरुजन जिसमे विशेषकर मनोज सर, प्रेम सर, राजेश जी,ओमजी व समस्त गुरुजन व सरस्वती ज्ञान केंद्र के समस्त गुरुतुल्य साथी जिनको पाकर मेरे जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार मिटा तथा आपके ही मार्गदर्शन से  यह जीवन #जीवन बना है, अब परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है की मुझे आप के बताए पथ पर अनवरत आगे बढ़ने की शक्ति दे।

आप सबका आशीर्वाद सदैव यूं ही मिलता रहे यही मेरी भावी सफलता होगी ।।

मैं मेरे  उन समस्त गुरुजन का भी विशेष आभारी हूं जिन्होंने मुझे *क, ख ग घ ड़* से लेकर इस मुकाम के योग्य अपेक्षित ज्ञान से पूरित किया और एक जीवनसार सिखाया तथा मेरे लक्ष्य साधक रहे।।

आप सब लोगो का पुनः बहुत-बहुत आभार।।
आपका आभारी- भींवा राम गुर्जर
         वरिष्ठ अध्यापक (हिन्दी)

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

सफलता एक संगम है

परमपिता परमेश्वर, देवतुल्य गुरुजन, मेरे चाहने  वालों माता-पिता के आशीर्वाद और दुआओं से राजस्थान सेकंड ग्रेड टीचर एग्जाम 2016 में 232 वीं जनरल रैंक से चयनित  होने पर आप सभी का हार्दिक आभार!!धन्यवाद!!

सफल पुरुष भरमवश अपनी सफलता का श्रेय केवल और केवल स्वयं (अपने आप) को देता रहता है जबकि मुझे तो नागार्जुन की कविता फसल सिखाती है कि:- एक के दो के नही कई नदियों के पानी का जादू है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे कई गुरुओ के ज्ञान कौशल का समग्र रूप है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
हवा की थिरकन है सूरज की किरणों का रूपांतरण है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे स्नेहीजनों और सद्-मित्रों की सुसंगति का असर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
नागार्जुन के शब्दों में मिट्टी का गुणधर्म है फसल, ठीक इसी प्रकार मेरे माता-पिता और भाई के संचित पसीने से पोषित माहौल पर निर्भर है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
किसान के हाथों की मेहनत के स्पर्श की गरिमा है फसल, ठीक इसी प्रकार प्रतियोगी भावों से पूरित त्याग,समर्पण,धैर्य-धीरज और मेहनत से सिंचित है मेरे जीवन का हर मुकाम सफल।।
कुल मिलाकर जिस प्रकार कोई फसल किसी एक तत्व का सयोंग मात्र नही होकर कई घटकों का यानी पानी,प्रकाश,वायु,मिट्टी की अनुकूलता और किसान की मेहनत आदि सकारात्मक तत्वों संगम है ठीक इसी प्रकार अपने जीवन की हर मंजिल की नींव भी माता-पिता,भाई-सखा और गुरुजन इत्यादि सकारात्मक संघटकों द्वारा अपने-अपने स्तर पर बहुत बड़े योग के रूप में किसी मंजिल की सीढ़ियां बनकर हमे गंतव्य तक पहुचने में सहयोग प्रदान करते  है और भरमवश लोग यह भूल जाते है कि इन लोगो की बदौलत ही आज हमने यह मुकाम पाया है  यही अपने जीवन की सफलता का मूल मंत्र है।।

मेरे परम् आदरणीय  गुरु और गुरुतुल्य  मित्रों आपको पाकर मेरे जीवन का अज्ञान रूपी अंधकार मिटा हैं।
आपके ही मार्गदर्शन से ही मेरा जीवन #जीवन बना है, ईश्वर से प्रार्थना है की मैं आप के बताए पथ पर अनवरत आगे बढ़ सकू ,
ऐसा आशीर्वाद आपका सदैव मिलता रहे ।।

अतः गुरु ही जीवन तारक है, गुरु ही तीर्थ, गुरु ही उद्धारक है।।
आप जैसे गुरुओ ने ही तो दी है इस छोटे साधक को एक नई पहचान, मैं तो कहूंगा गुरु ही ईश्वर गुरु ही है भगवान।।
जिसे मैं राधकृष्ण कहे सकू वो मेरे समस्त समादृत गुरुजन जिन्होंने मुझे ककहरा से लेकर इस मुकाम योग्य ज्ञान सीखाया है, कल तक जो जिंदगी एक अभिशाप थी आज मुझे आपने इसे मेहनत के बल आसान करना सिखाया है।।
जब-जब मुझे अंधकार नजर आया तब आपने ही इस भटके राही को प्रकाश दिखाया है ।। उन्ही की बदौलत आज  वही अभिशाप भरी  जिंदगी वरदान है ।।

आप लोगो का बहुत-बहुत आभार।।
आपका आभारी- भींवराज गुर्जर👏👏

रविवार, 15 सितंबर 2019

सकारात्मक प्रयासों के संग नई उम्मीद

मैंने अपने प्रतियोगी जीवन से जो अनुभव पाया उसे कलमबद्ध करने का प्रयास किया हैै, जो शायद किसी निराश साथी को आशा का भाव दे सके तो यह मेरा सौभाग्य ही होगा ।।

कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना,
दम घुटने लगे बारम्बार मिली विफलताओं से,
तो भी कदमो को हटने मत देना।
अंधियारे की ओट दीपक को चढ़ने मत देना,
विश्वास की बाती बनाना उत्साह का तेल भर लाना, कर अग्नि प्रज्वलित ज्ञान की अज्ञान रूपी अंधकार मिटाना।
पर इस आशा के  दीपक को निराशा रूपी अंधियारे की भेट चढ़ने मत देना।
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।

एक उम्मीद टूटे तो फिर से नई सजाओ,
जैसे हार हो गले का उसमे सपनो के मोती झड़ते जाओ।
हिम्मत करो हुंकार भरो पर बीच रास्ते में कदम न लड़खड़ाओ,
मंजिल मिलेगी एक दिन यह आशा जीवित रखो,
प्रयासो में त्रुटि न रहे ऐसी प्रत्याशा जीवित रखो।
आज आप हिम्मत हारकर कल की पीढ़ी में
चलना सीख रहे बच्चे को गिरने से डरने मत देना,
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।

केवल अंधेरा नही इसके दूसरे पक्ष में वो प्रकाश प्यारा देखो।
सब जितने वाले हारकर ही जीत पाए है,
इस नजर से वो अदृश्य सत्य कुछ न्यारा देखो।
विपदाओं से कांपे जगत जब,
दूर कहीं तब तुम समाधान सारा देखो।
इन विपदाओं से बढ़ते कदमो को घिरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।

ओ सफल राहगीरों इस नूतन राही को भी संघर्षों से भी भिड़ जाने दो,
विफलताओं का कर सामना निज निखार लाने दो।
पर ओ नूतन राही तू डरकर पथ के कष्टों से अपने विकासपथ को हरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।

सीखो इस सूरज से जो घटाटोप बादलों के बीच छिपकर भी अंततः चमक ही उठता है,
तुम भी इसी तरह अपनी तासीर को बनाये रखना
एक दिन वो मंजिल भी आपके कदमो में होगी बस इन कदमो को अनवरत बढ़ाये रखना।
भले ही मंजिल दूर लगे तो भी ऊर्जा स्तर को आद्योपान्त बनाये रखना,
यह मेहनत रूपी सीढियां किसी को दूर तुम्हारे कदमो से धरने मत देना।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।

लेखक-भीवराज गुर्जर