मैंने अपने प्रतियोगी जीवन से जो अनुभव पाया उसे कलमबद्ध करने का प्रयास किया हैै, जो शायद किसी निराश साथी को आशा का भाव दे सके तो यह मेरा सौभाग्य ही होगा ।।
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना,
दम घुटने लगे बारम्बार मिली विफलताओं से,
तो भी कदमो को हटने मत देना।
अंधियारे की ओट दीपक को चढ़ने मत देना,
विश्वास की बाती बनाना उत्साह का तेल भर लाना, कर अग्नि प्रज्वलित ज्ञान की अज्ञान रूपी अंधकार मिटाना।
दम घुटने लगे बारम्बार मिली विफलताओं से,
तो भी कदमो को हटने मत देना।
अंधियारे की ओट दीपक को चढ़ने मत देना,
विश्वास की बाती बनाना उत्साह का तेल भर लाना, कर अग्नि प्रज्वलित ज्ञान की अज्ञान रूपी अंधकार मिटाना।
पर इस आशा के दीपक को निराशा रूपी अंधियारे की भेट चढ़ने मत देना।
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
एक उम्मीद टूटे तो फिर से नई सजाओ,
जैसे हार हो गले का उसमे सपनो के मोती झड़ते जाओ।
हिम्मत करो हुंकार भरो पर बीच रास्ते में कदम न लड़खड़ाओ,
मंजिल मिलेगी एक दिन यह आशा जीवित रखो,
प्रयासो में त्रुटि न रहे ऐसी प्रत्याशा जीवित रखो।
आज आप हिम्मत हारकर कल की पीढ़ी में
चलना सीख रहे बच्चे को गिरने से डरने मत देना,
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
जैसे हार हो गले का उसमे सपनो के मोती झड़ते जाओ।
हिम्मत करो हुंकार भरो पर बीच रास्ते में कदम न लड़खड़ाओ,
मंजिल मिलेगी एक दिन यह आशा जीवित रखो,
प्रयासो में त्रुटि न रहे ऐसी प्रत्याशा जीवित रखो।
आज आप हिम्मत हारकर कल की पीढ़ी में
चलना सीख रहे बच्चे को गिरने से डरने मत देना,
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
केवल अंधेरा नही इसके दूसरे पक्ष में वो प्रकाश प्यारा देखो।
सब जितने वाले हारकर ही जीत पाए है,
इस नजर से वो अदृश्य सत्य कुछ न्यारा देखो।
विपदाओं से कांपे जगत जब,
दूर कहीं तब तुम समाधान सारा देखो।
इन विपदाओं से बढ़ते कदमो को घिरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
सब जितने वाले हारकर ही जीत पाए है,
इस नजर से वो अदृश्य सत्य कुछ न्यारा देखो।
विपदाओं से कांपे जगत जब,
दूर कहीं तब तुम समाधान सारा देखो।
इन विपदाओं से बढ़ते कदमो को घिरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
ओ सफल राहगीरों इस नूतन राही को भी संघर्षों से भी भिड़ जाने दो,
विफलताओं का कर सामना निज निखार लाने दो।
पर ओ नूतन राही तू डरकर पथ के कष्टों से अपने विकासपथ को हरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
विफलताओं का कर सामना निज निखार लाने दो।
पर ओ नूतन राही तू डरकर पथ के कष्टों से अपने विकासपथ को हरने मत देना,
कभी अपने निज सपनों को मरने मत देना।।
सीखो इस सूरज से जो घटाटोप बादलों के बीच छिपकर भी अंततः चमक ही उठता है,
तुम भी इसी तरह अपनी तासीर को बनाये रखना
तुम भी इसी तरह अपनी तासीर को बनाये रखना
एक दिन वो मंजिल भी आपके कदमो में होगी बस इन कदमो को अनवरत बढ़ाये रखना।
भले ही मंजिल दूर लगे तो भी ऊर्जा स्तर को आद्योपान्त बनाये रखना,
यह मेहनत रूपी सीढियां किसी को दूर तुम्हारे कदमो से धरने मत देना।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
भले ही मंजिल दूर लगे तो भी ऊर्जा स्तर को आद्योपान्त बनाये रखना,
यह मेहनत रूपी सीढियां किसी को दूर तुम्हारे कदमो से धरने मत देना।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
कभी अपने निज सपनो को मरने मत देना।।
लेखक-भीवराज गुर्जर
सभी साथियों का हार्दिक आभार
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर एवम प्रेरणादायक
जवाब देंहटाएंSanndar.....
जवाब देंहटाएंvry nyc👌👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंबहुत शानदार गुरुजी
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार sir जी
जवाब देंहटाएंप्रेरणास्पद लेख
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