रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध
यूक्रेन 1917 तक रूसी साम्राज्य का ही हिस्सा था, रूस के विघटन के बाद जो देश अलग हुए थे उनमें यूक्रेन भी एक था जिसने 1918 में की थी आजादी की घोषणा।
1921 में लेनिन की सेना से हारने के बाद यूक्रेन 1922 में सोवियत संघ का हिस्सा बन गया जिसका यूक्रेन में विरोध हुआ ।
1954 में रूसी समर्थक क्रीमिया यूक्रेन को दे दिया गया।
1991 में सोवियत संघ के विघटन के यूक्रेन आजाद राष्ट्र बन गया।
2010 में रूसी समर्थित विक्टर यानुकोविच यूक्रेन के राष्ट्रपति बने थे इनका रूस से करीबी और यूरोप से दूरी की वजह से विरोध हुआ 2014 में पद छोड़ा।
1954 में जो क्रीमिया यूक्रेन को दिया गया वर्ष 2014 में रूस ने पुनः क्रीमिया को अपने नियंत्रण में ले लिया
इसके साथ यूक्रेन के डोनबास, लुहांस्क और डोनेस्तक में रूसी समर्थक बहुसंख्यक थे इसलिए यहां भी विद्रोह हुए।
इसके बाद से पिछले आठ वर्षों से यूक्रेन सैनिक व रूसी अलगाववादियों के बीच सँघर्ष जारी रहा जिसमे लगभग 14000 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।
बेलारूस, जॉर्जिया पूरी तरह से रूस के साथ है।
नॉटो और यूक्रेन
दिसम्बर 2021 में यूक्रेन ने की NATO में शामिल होने की घोषणा जिसका रूस ने कड़ा विरोध जताया और यही से वर्तमान विवाद की नींव पड़ी- क्योकि यूक्रेन NATO का करीब है, कभी NATO ने यूक्रेन के साथ दिया तो यह रूस पर भारी पड़ सकता था।
इस समय यूक्रेन के NATO पड़ोसी देश यूक्रेन से लगी सीमा पर अपने सैनिक, हथियार औऱ सैन्य वाहन पहुँचा रहे है।
रूस का यूक्रेन पर हमले के कारण-
मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा यूक्रेन को NATO संगठन में शामिल करने की कवायद, रूस का लगता है कि यदि यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाता है तो उसकी सेना व अमेरिका हथियारों के दम पर नुकसान पहुचाने की कोशिश कर सकते है।
दूसरी वजह- अमेरिका और पश्चिमी-यूरोपीय देशों का नार्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन पर रोक लगाना।
तीसरी वजह- रूस नही चाहता कि यूक्रेन किसी भी तरह से अमेरिका के साथ जाए।
वर्तमान स्थिति-
रूस ने कहाँ-कहाँ किए हमले:- रूस ने अब तक यूक्रेन में कई जगह हमले किये हैं इनमें से दो विद्रोही इलाकों के अलावा राजधानी कीव के कई अहम ठिकाने शामिल हैं।
यूक्रेन के एयरपोर्ट्स को रूसी साइबर हमले खतरे को भांपते हुए बंद कर दिया है।
रूस ने यूक्रेन के ओडेशा पर कब्जा कर रूसी झंडा फहराया।